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MASUM MANSOON


तुम न कभी कभी जो आते हो
सच्ची बहुत रूलाते हो
कलियों जो नयी खिलाते हो
फिर साल भर छुप जाते हो ।


कोई गर्मी से दो चार है
किसको तुम्हारा इंतजार है 
तुम से ही तो बागों में बहार है
दिल यू ही कई बेक़रार है ।


देखों कई दिलों का सवाल है ।
हाल थोड़ा बदहाल है
वैसे मौका बेमिसाल है
सब बेहतरीन ये अमल है ।


'मासूम' लगते हो जब झूम के आते हो
खोखले सरहदों को चूम के आते हो
दिलों को दूरियों को तोड़ कर जाते हो
ये छोटी सी दुनिया को जोड़ कर जाते हो ।



कोई खिलता है,तो कोई मचलता है
आज कल हर कोई हसँ के मिलता है 
और जिंदगी में कितने रंग थे
ये तुम्ही से तो पता चलता है ।


मेरे शहर की सड़के तुम्हारे
,प्यार से बदनाम है
रो कर पी रही है ,कीचड़ का जामा है 
भीगी भीगी जो ये शाम है
अब तो जिंदगी में बस यही आराम  है ।

 :आप को हमारा ब्लॉग कैसा लगा हमें ज़रूर बताए ,मिलते है अगले ब्लॉग के साथ नमस्कार ।।
 :We will glad with your valuable Suggestions and reviews, thank you !


-Az👤
【Avoice63】°©

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